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Friday, 2 October 2026

Drishyam 3 Movie Review in Hindi: क्या इस बार पकड़ा जाएगा विजय सलगांवकर? दिमाग की नसें हिला देगा 'दृश्यम 3' का क्लाइमेक्स!

 2oct 

भारतीय सिनेमा में जब भी सस्पेंस और माइंड गेम्स की बात होती है, तो विजय सलगांवकर का नाम सबसे ऊपर आता है। 2 अक्टूबर, चौथी पास, पाव भाजी और सत्संग—ये कुछ ऐसे शब्द हैं जो हर थ्रिलर प्रेमी के दिल में बसे हुए हैं। निर्देशक अभिषेक पाठक एक बार फिर अजय देवगन और तब्बू की मशहूर फ्रेंचाइजी का आखिरी और सबसे बड़ा अध्याय 'दृश्यम 3: द कन्क्लूजन' लेकर सिनेमाघरों में लौट आए हैं। इस बार कहानी किसी रीमेक पर आधारित नहीं है, बल्कि मेकर्स ने एक पूरी तरह से नई और ओरिजिनल स्क्रिप्ट तैयार की है, जो इसे और भी ज्यादा अप्रत्याशित बनाती है।

आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या विजय सलगांवकर इस बार भी पुलिस की आँखों में धूल झोंकने में कामयाब रहा, या फिर उसकी 11 साल पुरानी मर्डर मिस्ट्री का अंत कानून के शिकंजे के साथ हुआ!
क्या है 'दृश्यम 3' की कहानी? (Plot Overview)
फिल्म की कहानी वहीं से शुरू होती है जहाँ 'दृश्यम 2' खत्म हुई थी। विजय सलगांवकर (अजय देवगन) और उसका परिवार अपनी जिंदगी को एक बार फिर से सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अतीत का साया उनका पीछा नहीं छोड़ता। अपने बेटे सैम को खोने के गम में डूबी पूर्व आईजी मीरा देशमुख (तब्बू) इस केस को किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने देना चाहतीं।
कहानी में असली ट्विस्ट तब आता है जब क्राइम ब्रांच के नए और बेहद शातिर एसपी राजवीर सिंह तोमर (जयदीप अहलावत) की एंट्री होती है। तोमर साहब के हाथ एक ऐसा नया और ठोस सबूत लग जाता है, जो सालों से दफन इस राज को पूरी तरह बेपर्दा कर सकता है। पुलिस एक बार फिर केस री-ओपन करती है और इस बार मुकाबला सिर्फ सबूतों का नहीं, बल्कि दो बेहद तेज दिमागों की सीधी टक्कर का है। अब 2 अक्टूबर के सच के सामने '23 जुलाई' का एक नया खेल शुरू होता है, जो दर्शकों को आखिरी मिनट तक स्क्रीन से चिपके रहने पर मजबूर कर देता है।
अजय देवगन और जयदीप अहलावत की बेमिसाल अदाकारी
अभिनय के मोर्चे पर यह फिल्म एक विजुअल ट्रीट है। अजय देवगन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि विजय सलगांवकर के किरदार को उनसे बेहतर कोई नहीं निभा सकता। उनकी आँखों की शांति और चेहरे का ठहराव स्क्रीन पर एक अलग ही खौफ और सस्पेंस पैदा करता है।
लेकिन इस बार महफिल लूटने का काम किया है जयदीप अहलावत ने। एसपी तोमर के किरदार में उनकी कड़क आवाज, बॉडी लैंग्वेज और अजय देवगन के साथ उनके आमने-सामने के डायलॉग्स फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) हैं। जहाँ पिछले पार्ट्स में पुलिस विजय से पीछे दिखती थी, वहीं इस बार जयदीप अहलावत ने विजय के पसीने छुड़ा दिए हैं। तब्बू ने हमेशा की तरह एक तड़पती और बदले की आग में जलती माँ के दर्द को बखूबी पर्दे पर उतारा है। श्रिया सरन और इशिता दत्ता ने भी सलगांवकर परिवार के डर और उनकी एकजुटता को अच्छे से निभाया है।
निर्देशन और स्क्रीनप्ले (Direction & Music)
अभिषेक पाठक का निर्देशन बेहद कसा हुआ है। एक ऐसी फ्रेंचाइजी का तीसरा पार्ट बनाना, जिससे दर्शकों की उम्मीदें आसमान पर हों, बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। फिल्म का पहला हाफ कहानी की नींव रखने और नया जाल बुनने में थोड़ा समय लेता है, जिससे रफ्तार थोड़ी धीमी महसूस हो सकती है। लेकिन सेकेंड हाफ शुरू होते ही फिल्म बुलेट ट्रेन की रफ्तार पकड़ लेती है।
अमर मोहिले का बैकग्राउंड म्यूजिक (BGM) हर सीन के सस्पेंस को दोगुना कर देता है। जब भी विजय सलगांवकर कोई नया दांव खेलता है, बैकग्राउंड स्कोर आपके रोंगटे खड़े कर देता है।
कमजोर कड़ियाँ (Weak Points)
फिल्म में कुछ जगहों पर सस्पेंस को बढ़ाने के लिए कुछ चीजें जरूरत से ज्यादा आसान और सुविधाजनक (Convenient) लगती हैं। पुलिस का कुछ सुरागों तक इतनी आसानी से पहुँच जाना थोड़ा खटकता है। हालांकि, फिल्म का ओवरऑल थ्रिल इतना मजबूत है कि आप इन छोटी-मोटी कमियों को आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं।
अंतिम फैसला: फिल्म देखें या नहीं? (Final Verdict)
'दृश्यम 3: द कन्क्लूजन' एक मस्ट-वॉच (Must Watch) मास्टरपीस थ्रिलर है। यदि आप थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं और विजय सलगांवकर के माइंड गेम्स के फैन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए पैसा वसूल अनुभव होने वाली है। फिल्म का आखिरी 20 मिनट का क्लाइमेक्स आपके होश उड़ा देगा और आपको यह सोचने पर मजबूर कर देगा कि क्या वाकई इंसान कानून से बड़ा हो सकता है!
  • रेटिंग: 4/5 स्टार (⭐⭐⭐⭐)

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