नवरात्रि का त्योहार सनातन धर्म में बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता रानी की आराधना करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।
यदि आप भी इस नवरात्रि माता रानी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पूजा की सही विधि, शुभ मुहूर्त और नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं इस साल की संपूर्ण पूजा गाइड।
नवरात्रि कलश स्थापना (घटस्थापना) शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है। सही मुहूर्त में स्थापना करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
घटस्थापना तिथि: प्रतिपदा तिथि
सुबह का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:15 AM से 10:22 AM तक (सबसे उत्तम समय)
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:46 AM से 12:33 PM तक (यदि सुबह चूक जाएं, तो इस समय करें)
सरल और संपूर्ण नवरात्रि पूजा विधि
घर पर माता रानी की कृपा पाने के लिए इस आसान विधि से पूजा करें:
पवित्रता: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या नए वस्त्र (लाल, पीले या सफेद रंग के) धारण करें।
चौकी सजाना: पूजा घर की सफाई करके एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
कलश स्थापना: एक मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी डालकर उसमें जौ (ज्वारे) बोएं। इसके बाद तांबे या मिट्टी के कलश में गंगाजल, पानी, सिक्का, अक्षत और सुपारी डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते रखकर ऊपर से नारियल (लाल कपड़े में लपेटकर) रख दें।
अखंड ज्योति: यदि आप नौ दिनों का व्रत रख रहे हैं, तो माता जी के सामने गाय के घी का अखंड दीपक जलाएं।
भोग और आरती: रोज़ सुबह-शाम मां दुर्गा को फल, मिठाई और पंचामृत का भोग लगाएं, दुर्गा चालीसा का पाठ करें और कपूर से आरती करें।
नवरात्रि में क्या करें (Dos)
नवरात्रि के नौ दिनों में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
ब्रह्मचर्य का पालन: नौ दिनों तक पूरी तरह से ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करें।
सात्विक भोजन: जो लोग व्रत नहीं भी रख रहे हैं, उन्हें भी घर में पूरी तरह सात्विक (बिना प्याज-लहसुन का) भोजन बनाना चाहिए।
मंत्र जाप: रोज़ 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी के दिन छोटी कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाकर भोजन कराएं और उनका आशीर्वाद लें।
नवरात्रि में क्या न करें (Don'ts)
माता रानी की नाराजगी से बचने के लिए इन गलतियों को करने से बचें:
घर खाली न छोड़ें: यदि आपने घर में अखंड ज्योति जलाई है या कलश स्थापना की है, तो घर को कभी भी ताला लगाकर अकेला न छोड़ें।
बाल और नाखून काटना: नवरात्रि के दौरान दाढ़ी बनाना, बाल काटना और नाखून काटना पूरी तरह वर्जित माना जाता है।
चमड़े की वस्तुओं का प्रयोग: पूजा के दौरान बेल्ट, पर्स या जूते जैसी चमड़े की चीजों का इस्तेमाल न करें।
क्रोध और विवाद: घर में किसी भी प्रकार का कलह, क्लेश या गाली-गलौज न करें, इससे लक्ष्मी जी रूठ जाती हैं।
- माता रानी के श्रृंगार और स्थापना के लिए:
- मां दुर्गा की सुंदर मूर्ति या तस्वीर
- लकड़ी की चौकी (आसन) और बिछाने के लिए लाल रंग का सूती या रेशमी कपड़ा
- माता जी के लिए लाल चुनरी, चूड़ियाँ, बिंदी, सिंदूर, मेंहदी और कानों के झुमके (पूरा सोलह श्रृंगार)
- तांबे या मिट्टी का कलश और ढक्कन
- कलश के ऊपर रखने के लिए पानी वाला जटादार नारियल
- कलश स्थापना और ज्वारे बोने के लिए:
- चौड़े मुंह वाला मिट्टी का एक बड़ा पात्र (ज्वारे बोने के लिए)
- साफ छानी हुई मिट्टी या रेत
- बोने के लिए साफ और अच्छे जौ (ज्वारे)
- गंगाजल और साफ पानी
- कलश में डालने के लिए: एक सिक्का, एक सुपारी, अक्षत (साबुत चावल) और हल्दी की एक गांठ
- कलश के मुंह पर सजाने के लिए 5 या 7 आम के पत्ते (या अशोक के पत्ते)
- कलावा (मौली धागा)
- दैनिक पूजा और अखंड ज्योति के लिए:
- शुद्ध गाय का घी या तिल का तेल
- पीतल या मिट्टी का दीपक (अखंड ज्योति के लिए बड़ा दीपक)
- रुई की बत्ती (अखंड ज्योति के लिए कलावे की लंबी बत्ती)
- धूपबत्ती और अगरबत्ती
- माचिस
- कपूर (आरती के लिए)
- अर्पण और भोग के लिए:
- ताजे लाल फूल (विशेषकर लाल गुड़हल या गुलाब) और फूलों की माला
- फल (केला, सेब, अनार आदि)
- मिठाई (पेड़ा या लड्डू) और मखाने
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण)
- पान के पत्ते और इलायची

No comments:
Post a Comment