क्रिकेट या बल्लेबाजों का तमाशा? जब 20 ओवर में बने 500 रन, तो फूट पड़ा गौतम गंभीर का गुस्सा!
आजकल का टी20 क्रिकेट पूरी तरह से बदल चुका है। अब मैदान पर चौके-छक्कों की ऐसी आंधी आती है कि दर्शकों का मनोरंजन तो खूब होता है, लेकिन गेंदबाजों के पसीने छूट जाते हैं। हाल ही में रांची में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए एक बेहद रोमांचक मुकाबले में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसने क्रिकेट पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
इस टी20 मैच में दोनों ही टीमों
के बल्लेबाजों ने मैदान के चारों तरफ मैदान मारते हुए कुल मिलाकर 500 से भी ज्यादा रन ठोक डाले। भारत की तरफ से खड़े किए गए 250 रनों के पहाड़ जैसे बड़े स्कोर को भी वेस्टइंडीज की टीम ने बहुत ही आसानी से बौना साबित कर दिया। वेस्टइंडीज के धुरंधरों ने सिर्फ बाउंड्री (चौकों और छक्कों) की मदद से ही 204 रन बटोर लिए और 19वें ओवर में ही मैच अपने नाम कर लिया।
गौतम गंभीर का गुस्सा और उठते बड़े सवाल
इस शर्मनाक हार और गेंदबाजों की जमकर हुई धुनाई के बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाए। मैच खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जो बयान दिया, उसने क्रिकेट जगत में एक नई बहस छेड़ दी है।
गंभीर ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि आज का क्रिकेट पूरी तरह से एकतरफा होता जा रहा है। नियमों को इस तरह बनाया जा रहा है कि सारा फायदा सिर्फ बल्लेबाजों को मिले। छोटी बाउंड्री, सपाट पिचें और भारी-भरकम बल्ले मिलकर गेंदबाजों को असहाय बना रहे हैं। कोच ने सीधे शब्दों में चिंता जताते हुए कहा कि अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में कोई भी बच्चा गेंदबाज बनने का सपना नहीं देखेगा क्योंकि इस खेल में गेंदबाजों का करियर पूरी तरह से दांव पर लग चुका है।
क्या खेल का संतुलन बिगड़ रहा है?
क्रिकेट को हमेशा से 'बल्ले और गेंद' का एक संतुलित मुकाबला माना जाता रहा है। लेकिन आधुनिक टी20 फॉर्मेट में यह संतुलन पूरी तरह बिगड़ता हुआ दिख रहा है। जब किसी मैच में गेंदबाजों के पास अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका ही न बचे और हर अच्छी गेंद पर भी छक्का लग जाए, तो खेल का असली रोमांच खत्म होने लगता है। गंभीर का यह गुस्सा सिर्फ एक मैच हारने का नहीं था, बल्कि क्रिकेट की गिरती हुई गेंदबाजी कला को बचाने की एक पुकार थी।
अब देखना यह होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) पिचों और बाउंड्री के नियमों में कुछ बदलाव करती है, या फिर भविष्य में क्रिकेट सिर्फ बल्लेबाजों का एकतरफा तमाशा बनकर रह जाएगा।

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