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Wednesday, 2 September 2026

महाराष्ट्र के सरकारी दफ्तरों में अब मिलेगा हेल्दी खाना! मिलेट खिचड़ी, अंकुरित अनाज और सोलकढ़ी होगी मेन्यू में शामिल


महाराष्ट्र के सरकारी दफ्तरों में अब हेल्दी खाना! मिलेट खिचड़ी, अंकुरित अनाज और सोलकढ़ी जैसे विकल्प होंगे उपलब्ध


महाराष्ट्र न्यूज | 3 सितंबर 2026


महाराष्ट्र के सरकारी कार्यालयों और सरकारी कार्यक्रमों में मिलने वाले खाने को लेकर राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार सरकारी कैंटीनों के साथ-साथ आधिकारिक बैठकों और कार्यक्रमों में पौष्टिक खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
इस नए निर्देश का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों और कार्यक्रमों में शामिल लोगों के बीच संतुलित और बेहतर खान-पान को बढ़ावा देना है। इसके तहत मिलेट खिचड़ी, अंकुरित अनाज की सब्जी, सोलकढ़ी, मौसमी फल और कई अन्य पौष्टिक विकल्प मेन्यू में शामिल किए जा सकते हैं।

सरकारी कैंटीन में क्या-क्या मिलेगा?
नए हेल्दी मेन्यू में स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को भी जगह दी गई है। छोटे कार्यक्रमों या बैठकों में नाश्ते और रिफ्रेशमेंट के लिए मौसमी फल, उबले या भुने चने, मूंगफली, अंकुरित अनाज, वेजिटेबल पोहा, इडली-सांभर, वेजिटेबल उपमा और मिलेट खिचड़ी जैसे विकल्प सुझाए गए हैं।
इसके अलावा उबले अंडे, नट्स और बीज जैसे विकल्प भी शामिल किए जा सकते हैं। इससे लोगों को केवल तले हुए या ज्यादा processed snacks पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग पौष्टिक विकल्प मिल सकेंगे।

पेय पदार्थों में भी होगा बदलाव
सरकारी कार्यक्रमों में केवल खाने पर ही नहीं, बल्कि पेय पदार्थों पर भी ध्यान दिया गया है।
सुझाए गए विकल्पों में नारियल पानी, छाछ, सोलकढ़ी, बिना चीनी वाला दूध, सीमित चीनी या गुड़ वाला नींबू पानी और बिना चीनी की ग्रीन या हर्बल चाय शामिल हैं।
इसका उद्देश्य ज्यादा चीनी वाले पेय पदार्थों की जगह अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना है।

आधे दिन या पूरे दिन के कार्यक्रमों के लिए अलग मेन्यू
अगर सरकारी कार्यक्रम आधे दिन या पूरे दिन का है, तो मेन्यू में ज्यादा संतुलित भोजन रखने का सुझाव दिया गया है।
इसमें ज्वार, बाजरा या रागी की भाकरी, मल्टीग्रेन चपाती, हाथ से कुटे या ब्राउन राइस, दाल, उसल, हरी और मौसमी सब्जियां, दही या छाछ और सलाद जैसे विकल्प शामिल हैं।
इसके अलावा कम तेल वाली खिचड़ी, वेजिटेबल पुलाव, पनीर, अंकुरित अनाज की सब्जी और उचित तरीके से पकाई गई मछली, चिकन या मटन जैसे विकल्प भी सुझाए गए हैं। मिठाई की जगह फल रखने पर भी जोर दिया गया है।

ज्यादा नमक, चीनी और तेल वाले खाने को कम करने पर जोर
सरकार के इस निर्देश में केवल नया मेन्यू जोड़ने की बात नहीं है। इसमें ज्यादा चीनी, नमक, unhealthy fats और ultra-processed foods की मात्रा को धीरे-धीरे कम करने पर भी जोर दिया गया है।
इसका मतलब यह है कि सरकारी कैंटीन और कार्यक्रमों में मिलने वाले खाने में पौष्टिक विकल्पों की हिस्सेदारी बढ़ाने और अत्यधिक processed तथा ज्यादा तेल-नमक-चीनी वाले विकल्पों को कम करने की दिशा में काम किया जाएगा।
किन सरकारी संस्थानों में लागू होगा?
यह पहल केवल मंत्रालय की कैंटीन तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार इसका दायरा महाराष्ट्र के विभिन्न सरकारी विभागों और कार्यालयों तक है।
इसमें सरकारी विभाग, निदेशालय, आयुक्त कार्यालय, जिला कलेक्टर कार्यालय, जिला परिषद, नगर निगम और नगरपालिकाएं, सरकारी प्रशिक्षण संस्थान, सरकारी सहायता प्राप्त स्वायत्त संस्थाएं और सरकारी कैंटीन शामिल हैं।
नए Catering Contracts में भी शामिल होंगे नियम
सरकारी विभागों को नए भोजन और catering contracts में हेल्दी मेन्यू से संबंधित प्रावधान शामिल करने के लिए कहा गया है।
मेन्यू की निगरानी के लिए inspection committee और nodal officer की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा कैंटीन का समय-समय पर निरीक्षण और Food and Drug Administration के साथ मिलकर audit करने की बात कही गई है।
खाने की nutritional information को प्रदर्शित करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि लोगों को उपलब्ध भोजन के बारे में बेहतर जानकारी मिल सके।
सरकार का उद्देश्य क्या है?


सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस पहल का उद्देश्य लोगों में स्वस्थ खान-पान को लेकर जागरूकता बढ़ाना और गैर-संचारी बीमारियों से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद करना है।
बदलती जीवनशैली, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और processed तथा ultra-processed food की बढ़ती खपत को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं में शामिल किया गया है। ऐसे में सरकारी संस्थानों में बेहतर भोजन विकल्प उपलब्ध कराने को एक व्यवहारिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

आम लोगों के लिए क्या सीख?
सरकारी कार्यालयों के मेन्यू में बदलाव केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित विषय नहीं है। इससे आम लोगों को भी रोजमर्रा के भोजन में स्थानीय और पौष्टिक विकल्पों को प्राथमिकता देने का संदेश मिलता है।
मिलेट्स, दालें, अंकुरित अनाज, सब्जियां, फल, छाछ और कम तेल वाला भोजन भारतीय खान-पान का हिस्सा रहे हैं। इसलिए हेल्दी डाइट के लिए हमेशा महंगे या विदेशी खाद्य पदार्थों की जरूरत नहीं होती।
हालांकि किसी व्यक्ति की विशेष स्वास्थ्य स्थिति में डाइट से जुड़े फैसले डॉक्टर या योग्य dietitian की सलाह के अनुसार ही लेने चाहिए।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र सरकार की यह पहल सरकारी कैंटीन और आधिकारिक कार्यक्रमों में भोजन के विकल्पों को ज्यादा संतुलित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मिलेट खिचड़ी, अंकुरित अनाज, भाकरी, दाल, सब्जियां, फल, छाछ और सोलकढ़ी जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने के साथ ज्यादा processed और अधिक नमक-चीनी-तेल वाले भोजन को कम करने पर जोर दिया गया है।
अगर यह व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो सरकारी कार्यालयों में भोजन की आदतों को बेहतर बनाने के साथ स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
Source: महाराष्ट्र सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के सरकारी निर्देशों पर आधारित जानकारी।


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